फूलो का जनाज़ा

एक राष्ट्र की हीत उसके लोगो की हीत मे होती है, 70 साल बाद भी अगर हम यह सोचना पड़ रहा है की अपने लोगो को कैसे बचाया जाए तो मेरा मानना यह है की हम चाँद पे चल जाए, महाशक्ति बन जाये क्या फर्क पड़ता है, जब देश की 40% आबादी सिर्फ और सिर्फ मौत का इंतज़ार कर रही है। हल मे जो कुछ भी हुआ गोरखपुर मे गुलजार साहब ने आत्मा को झंझोर देने वाली बात काही उन्होने ने कहा “जनाजो मे फूल तो बड़े देखे पहली बार फूलो का जनाजा देखा” पर सायद यह पहली बार नहीं था हाँ यह पहली बार हुआ की बात इतने बड़े पैमाने मे सबके सामने आयी है।
और हम उत्तरपरदेश की ही क्यों बात करे पूरा देश काही न काही संगर्ष कर रहा है सिर्फ और सिर्फ जीने के लिए, यूनाइटेड नेशन्स के रिपोर्ट यह कहेता है की भारत के लोग प्रकृतिक मौत कम गरीबी और मेडिकल अभाव के कारण जादा मरते है, और उन्हे मरने के लिए छोड़ भी दिया जाता है। अगर एक गरीब बीमार पड़ता है तो उसके पास पैसे नहीं इलाज को और सरकारी अस्पताल तो नर्क से कम नहीं पार्लियामेंट की टॉइलेट भी कई गुना अच्छी है सरकारी अस्पतालो से।
गोरखपुर हादसे के बाद मीडिया ट्राइल हुआ तो पता चला ऑक्सिजन तो उस दिन खत्म हुई थी पर बच्चे तो 40 साल पहले से मर रहे है, पिछले 40 साल माय 30 हज़ार से जादा बच्चो न डैम तोड़ा है सिर्फ गोरखपुर मे और कारण बस एक ही है जापानी बुखार। सरकार आज तक एक ऐसी अंटीबीओटीक नहीं बना पायी अपने सिस्टम मे जो इससे लड़ सके। अभी इंतज़ार करे कोई पागल नेता यह न बोल की जापानी बुखार जापानिओ द्वारा साजिस कर के फैलाया गया है।
अगर हम पूरे भारत की बात करे तो हर साल 2 लाख से जादा बच्चे सरकारी अस्पतालो मे दम तोड़ रहे है, और जहा तक निजी अस्पतालो की बात है यहा तो हालत जनब और खराब है पहले तो आप अजरज मे पद जाओगे की यह कोई शॉपिंग मॉल है या हॉस्पिटल फिर जब आपकी जेब लूट जाएगी तो आपको समाज आयेगा की यहा से लोगो की एसी डोर से स्वर्ग के लिये एक्सपोर्ट की जाती है और सरकारी हॉस्पिटल मे जनता द्वार से।
और इस हालत के लीआ दोषी सब है वो नारंगी वाली सरकार, वो नेहरू की खनदान वाली सरकार वो चाय वालों की सरकार क्यों की बिल्डिंग सबने बनाए लोग को बनाने की कोशीश किसी ने नहीं की।
अगर हालत ऐसे ही रहे जहा गरीब और गरीब बनेगा और अमीर और अमीर बनाता रहे जाएगा तो जल्द ही समाज मे अराजकता का ज्वार उठेगा वैसे भी गरीब अमीर से 99% जादा है काही देश पूरा खाली ही न कर दे।

Kumar Kaustubh

Kumar Kaustubh

Kumar Kaustubh is an Indian author and has pen downed 6 novels and more then 500 poems. A passionate author and aspiring journalist.

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